11 अगस्त 2019 - 15:36
कभी भी टूट सकता है कि ईरान के धैर्य का बांध, फ़ार्स की खाड़ी के देशों और पश्चिमी देशों को अतवान की सलाह... ईरान को मत छेड़ो

लंदन से प्रकाशित होने वाले अरबी भाषा के समाचार पत्र राय अलयौम के संपादक अब्दुलबारी अतवान का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प, तेहरान पर दबाव के बहाने, समुद्री गठबंधन बनाकर फ़ार्स की खाड़ी देशों को दुह रहे हैं।

हुर्मुज़ स्ट्रेट या फ़ार्स की खाड़ी में समुद्री यातायात की ज़िम्मेदारी उन देशों पर है जो उसके तट पर स्थित हैं अर्थात ईरान या फ़ार्स की खाड़ी के अरब देश, लेकिन बात यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प, क्षेत्र और दुनिया को नये युद्ध में उलझाना चाहते हैं? और वह भी ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए समस्त दबावों और षड्यंत्रों के बाद ताकि यह देश वाशिंग्टन की शर्तों पर वार्ता की मेज़ पर आ जाए, वाशिंग्टन की नीतियां एक बार फिर विफल रहेंगी।

अब्दुलबारी अतवान लिखते हैं कि अमरीकी ड्रोन का मार गिराया जाना और ब्रिटिश आयल टैंकर की हिरासत, यह संदेश देती है कि ईरान का वर्तमान संयम ज़्यादा लंबा नहीं होगा और इस संदेश पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

अतवान अपने लेख में लिखते हैं कि हमारे लिए इस बात को समझना बहुत कठिन है कि क्यों अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प, बड़ी उत्सुकता के साथ हुर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री यातायात को सुरक्षित करने के लिए साठ देशों को मिलाकर गठबंधन बना रहे हैं।

जर्मन चांस्लर ने पूरे साहस के साथ अमरीका की इस मांग को रद्द कर दिया और उन्होंने इस बारे में अपना और अपनी सरकार का दृष्टिकोण पेश किया और कहा कि वह और उनकी सरकार इस प्रकार की योजनाओं से दूर हैं क्योंकि उन्हें ट्रम्प के अनाड़ी क़दमों पर भरोसा नहीं है और उसके ख़तरों से भयभीत हैं और यही कारण है कि उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी किया और बल दिया कि उनकी सरकार फ़ार्स की खाड़ी के संकट के समाधान के शांति पूर्ण विकल्प पर प्रतिबद्ध है, क्योंकि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने की वजह से क्षेत्र की यह हालत हुई है और जर्मनी सहित परमाणु समझौते के अन्य पक्ष, परमाणु समझौते पर यथावत प्रतिबद्ध हैं।

इस समय अमरीका के समुद्री गठबंधन के गठन पर जिसने सहमति प्रकट की है वह ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जान्सन हैं जिन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति को नये पश्चिम में नस्लभेद का पितामह क़रार दिया है।

अब्दुल बारी अतवान इस बारे में लिखते हैं कि अमरीकी प्रतिबंधों के मुक़ाबले में ईरान के धैर्य की कोई सीमा नहीं है और यही वह चीज़ है जिसने अमरीका को ईरान के बारे में सच मानने पर मजबूर कर दिया है और इसीलिए वह इसको हथकंडे के रूप में प्रयोग कर रहा है, यही उसी नीति से प्रेरित है जो पश्चिमी तट और गोलान हाइट्स में इस्राईल द्वारा लागू की जा रही है, मैं नहीं समझता कि आईआरजीसी या उसके क्षेत्रीय घटक इस प्रक्रिया को विफल बनाने या रोकने के लिए किसी ही प्रकार की कार्यवाही से संकोच करेंगे।

ईरान के अधिकारियों ने हर अवसर पर और हमेशा ही यह कहा है कि वे युद्ध नहीं चाहते और युद्ध शुरु करने वाले नहीं होंगे किन्तु यदि युद्ध हुआ तो युद्ध ईरान ही समाप्त करेगा। ईरान ने कह दिया है कि युद्ध की स्थिति में फ़ार्स की खाड़ी में अमरीकी ठिकानों और उसके पिट्ठु इस्राईल के रणनैतिक ठिकानों को तबाह कर दिया गया जाएगा।

अब्दुल बारी अतवान अंत में लीखते हैं कि ट्रम्प समुद्री गठबंधन का हव्वा बिठाकर फ़ार्स की खाड़ी के देशों को और अधिक से अधिक दुहना चाहते हैं क्योंकि उनकी ज़बान से यह बार बार सुना गया है कि अमरीका, फ़ार्स की खाड़ी के देशों का मुफ़्त में समर्थन नहीं करता और इन देशों को चाहिए कि वह अपने ख़ज़ानों का मुंह खोल दें और समर्थन की क़ीमत चुकाएं।